Two Line Alfaaz Shayari in Hindi | दो लाइन शायरी हिंदी में

Two Line Alfaaz Shayari | Two line Shayari Hindi Mein | दो लाइन शायरी हिंदी में लिखी हुई | Two line Shayari in Hindi | दो लाइन शायरी हिंदी में |

Two Line Alfaaz Shayari in Hindi

औक़ात नही थी जमाने में जो मेरी कीमत लगा सके,
कबख़्त इश्क में क्या गिरे, मुफ़्त में नीलाम हो गए।

 

क्यो गुमसुम हो राज ऐ दिल तो खोला करो,
हाल ऐ दिल ना सही पर कुछ तो बोला करो।

 

सोचा ना था वो शख्स भी इतना जल्दी साथ छोङ जाएगा,
जो मुझे उदास देखकर कहता था की मैं हू ना।

 

बन गए हो तुम वो ख़्याल यकिनन,
​जिसे चाहकर भी भुलाया नहीं जाता।

 

यूँ ही भटकते रहते हैं अरमान तुझसे मिलने के,
न ये दिल ठहरता है न तेरा इंतज़ार रुकता है।

 

मेरे दिल को अक्सर छू लेते है ख़ामोश चेहरे​,
हंसते हुए चेहरों में मुझे फरेब नज़र आता हैं।

 

दिल मजबूर हो रहा है तुम से बात करने को,
बस जिद ये है कि बात की शुरुआत तुम करो।

 

दिन में ना जाने कितनी बार होता है ऐसा,
तेरा याद आना और मेरा उदास हो जाना।

 

ना डरा मुझे ऐ वक़्त नाकाम होगी तेरी हर कोशिशे,
​ज़िन्दगी के मैदान में खड़ा हूँ दुआओं का लश्कर लेकर।

 

दूर रहकर भी तुम्हारी हर ख़बर रखतें हैं,
हम पास तुम्हें कुछ इस कदर रखते है।

 

लाजमी नही है की हर किसी को मौत ही छूकर निकले,
​किसी किसी को छूकर जिंदगी भी निकल जाती है।

 

दिल साफ़ करके मुलाक़ात की आदत डालो​,
​धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं।

 

थोड़ी थोड़ी ही सही मगर बातें तो किया करो,
चुप रहते हो तो भूल जाने का एहसास होता है।

 

कोई चेहरे का दीवाना किसी को तन की तलब,
​अदाएं पीछा करवाती हैं साहब यहाँ मोहब्बत कौन करता है।

 

इश्क़वालों में बड़प्पन ज़रूरी है यारो,
छोटे दिल में महबूब बसाये नहीं जाते।

 

कभी उम्मीदें उधड़ जाएँ तो मेरे पास ले आना,
मैं हौसलों का दर्जी हूँ, रफ़ू मुफ़्त में कर दूँगा।

 

वो अदाएं ही क्या जो दिल को न हिला दे,
और वो प्यार ही क्या जो आँसू न गिरा दे।

 

ये जो मुस्कराहट का लिबास पहना है मैंने,
दरअसल खामोशियों को रफ़ू करवाया है मैंने।

दुख के दस्तावेज़ हो या सुख की वसीयत,
ध्यान से देखोगे तो नीचे मिलेंगे ख़ुद के ही दस्तखत।

 

खास हैं वो लोग इस दुनिया में,
​जो​ ​वक्त आने पर वक्त दिया करते है।

 

जिस उम्र में हमारे दाँत टूटे थे,
आज-कल के बच्चों के उस उम्र में दिल टूट जाते हैं।

 

ना जाने क्यों कोसते हैं लोग बदसूरती को,
बर्बाद करने वाले तो हसीन चेहरे होते हैं।

 

क्या बात है बड़े चुप बैठे हो क्या हुआ,
कोई बात दिल पे लगी है या कहीं दिल लगा बैठे हो।

 

किसी की आँखों का ख्वाब बन रहे हैं,
शुक्र है खुदा हम भी नायाब बन रहे हैं।

 

लफ्जों से इतना आशिकाना ठीक नहीं है ज़नाब,
​किसी के दिल के पार हुए तो इल्जाम क़त्ल का लगेगा।

 

तुम याद ना करो, तो भी अच्छे लगते हो,
खुदा जाने अगर याद करते तो क्या होता।

 

बहुत जुदा है औरोँ से मेरे दर्द की कहानीँ,
जख्म का कोई निशाँ नहीँ और दर्द की कोई इँतहा नहीँ।

 

चलो शाम का दस्तूर पूरा किया जाए,
उनकी यादों का वक़्त है,
एक बार फिर उनको याद किया जाए।

बड़ी ज़ालिम होती है ये एकतरफा मुहब्बत,
वो याद तो आते हैं पर याद नहीं करते।

 

मैं बन जाऊं रेत सनम, तुम लहर बन जाना,
भरन मुझे अपनी बाहों में, अपने संग ले जाना।

 

जी चाहे कि दुनिया की हर एक फ़िक्र भुला कर,
दिल की बातें सुनाऊं तुझे मैं पास बिठाकर।

 

अच्छा लगता हैं तेरा नाम मेरे नाम के साथ,
जैसे कोई खूबसूरत जगह हो हसीन शाम के साथ।

 

रिश्तों को बस इस तरह से बचा लिया करो,
कभी मान जाया करो तो कभी मना लिया करो।

 

मैं वक़्त बन जाऊं तू बन जाना कोई लम्हा,
मैं तुझमें गुजर जाऊं तू मुझमें गुजर जाना।

 

उँगलियाँ मेरी वफ़ा पर ना उठाना दोस्तों,
जिसको शक़ हो वो मेरा साथ निभाकर देखे।

 

तेरी जगह आज भी कोई नही ले सकता,
पता नही वजह तेरी खूबी है य मेरी कमी।

 

मोहब्बत की कहूँ देवी या तुमको बंदगी कह दूँ,
बुरा मानो न गर हमदम तो तुमको ज़िन्दगी कह दूँ।

तुम आओ तो थोड़ी छांव लेते आना,
जिंदगी की उलझनों में झुलस रहा है मेरा वजूद।

 

है इश्क एक गुनाह तो ये गुनाह कर लिया,
तेरे दर्द से इस दिल को तबाह कर लिया।

 

तलब उठती है बार बार तुमसे बात करने की,
ना जाने देखते देखते कब तुम लत बन गये।

 

फितूर होता है हर उम्र में जुदा जुदा,
खिलौनें, माशूका, रुतबा और फिर ख़ुदा।

 

देखा जो इश्क़ आँखों में तो कहने लगा हकीम,
अफ़सोस की तुम अब इलाज के काबिल ही नहीं रहे।

 

हर शख्स दूसरों को अखबार समझता है,​
​अपने मतलब की खबर काट लेता हैं।

 

बहुत जुदा है औरोँ से मेरे दर्द की कहानीँ,
जख्म का कोई निशाँ नहीँ और दर्द की कोई इँतहा नहीँ।

थोड़ी सी नाराजगी भी लाजिमी थी इश्क में,
सने बात नहीं की तो हमने भी छोड़ दी।

 

कुछ लोग ऐसे भी है मेरी जिंदगी में,
जो बस मेरे सामने ही मेरे हैं।

 

खामोशियों से मिल रहे, खामोशियों के जवाब,
अब कैसे कहूँ कि उनसे मेरी बात नहीं होती।

लाजिमी नहीं के तुझे आँखों से ही देखूँ,
तुझे सोचना भी किसी दीदार से कम नहीं।

 

वक्त इशारा देता रहा हम इत्तेफाक़ समझते रहे,
​बस यु ही धोखे खाते रहे और इस्तेमाल होते रहे।

 

अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा रखो,
की जो तुम्हे खोएगा वो हमेशा रोएगा।

 

मेरा असली दर्द तो सिर्फ मेरा खुदा जानता है,
तुमने तो सिर्फ मेरी नकली मुस्कान देखी है।

 

फिज़ा में फैल चली मेरी बात की खुशबू​,
​अभी तो मैंने हवाओं से कुछ कहा भी नहीं।

 

रंजिशे हैं अगर दिल में कोई तो खुलकर गिला करो,
​मेरी फितरत ऐसी है कि मैं फिर भी हँस कर मिलूंगा।

 

जिंदगी छोटी नही होती है जनाब,
लोग जीना ही देरी से शुरु करते है।

आज बुरा है तो क्या हुआ कल अच्छा भी तो आएगा,
यह वक्त है जनाब रुक थोड़ी जाएगा।

 

हम ने रोती हुई आँखों को हसाया है सदा,
इस से बेहतर इबादत तो नहीं होगी हमसे।

 

मैं निकला सुख की तलाश में रस्ते में खड़े दुखो ने कहा,
हमें साथ लिए बिना सुखों का पता नहीं मिलता जनाब।

 

सब को इकट्ठा रखने की ताकत प्रेम में है,
और सब को अलग करने की ताकत भ्रम में है।

 

मेरे दर्द भी औरो के काम आते है,
मैं जो रो दूँ तो लोग मुस्कुराते है।