Top 10+ Best Poetry in Hindi | बेहतरीन कविताएं हिंदी में.!

मैं कह रहा हूँ…

मैं कह रहा हूँ…
मेरी आंखे नौच ली जाए,
मेरे मुँह पर तमाचे मारे जाए,
मेरे ज़ज्बे पर तेल छिड़का जाए,
मेरी मानो मुझे जला दिया जाए!!

मैं कह रहा हूँ
एक खंजर लिया जाए,
जिस्म को छेद छेद के छलनी किया जाए,
मोहब्बत नाम का एक एक कतरा निचोड लिया जाए!!

मैं कह रहा हूँ ..
मुझे चन्द घूंट ज़हर पिलाया जाए,
फिर तडपते,मचलते,मरते हुए सूफ़ी को
बिना कफ़न के दफन किया जाए.!!

मै कह रहा हूँ
मैंने मोहब्बत की है मुझे मौत की सजा दी जाए,
मुझे सरे आम फांसी लगा दी जाए.!!

मै कह रहा हूँ
क्योकि मैंने मोहब्बत की हैं!!

 

कहाँ रात गुज़ारूँ… 

ये शहर है अंजान कहाँ रात गुज़ारूँ,
है जान-न-पहचान कहाँ रात गुज़ारूँ।

दामन में लिए फिरता हूँ मैं दौलत-ए-ग़म को,
हर राह है सुनसान कहाँ रात गुज़ारूँ,

कुटिया तो अलग साया-ए-दीवार नहीं है,
मुश्किल में फंसी है जान कहाँ रात गुज़ारूँ।

इस राहगुज़र पर तो शजर भी नहीं कोई,
और सर पे है तूफ़ान कहाँ रात गुज़ारूँ।

बहरूपिए फिरते हैं हर इक राहगुज़र पर,
कोई नहीं इंसान कहाँ रात गुज़ारूँ।

दर है कोई और न दरीचा ही खुला है,
हर कूचा है वीरान कहाँ रात गुज़ारूँ.!!

 

अब सोते है.. .. 

अब सोते है गहरी नींद में,
खोजाते है एक दूजे के सपनोंमे।

मुलाकात होगी कभी हकीकत में,
चलो यादें बना लेते हैं ख्वाबों में ।

खुशियां तो है अब हमारे दामन में,
अगर आए आंसु तो पोंछ लेना हमारे आंचल से ।

हम अपनी जान भी दे देंगे मुहोब्बत में,
पर तुम्हारे साथ जिंदगी जीना जरूरी है इस जमाने में।

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हम तुम्हारी खुशी की खातिर जीत लायेंगे वक्त तूफान में,
तुम बस कभी दूर मत होना झगड़े की छोटिसी चिंगारी में।

तुम्हे भर लिया है हमने अपनी आंखों में,
बस कभी आंसु ना आने देना कही बेह ना जाओ पानी में।

मिलना हमारा तुमसे लिखा होगा नसीब में,
पर चलो आज हम अमर हो जाते है हमारी प्रेम कहानी में।

तुम्हे हक है दिल्लगी का तुम रहते हो मेरे दिलमे,
कभी उतर के देखना तुम, खुदको पाओगे मेरे जेहन में ।

रंजिशे बहुत सी आयेगी हमारे खूबसूरत रिश्ते में,
पर दिया – बाती सा साथ हमेशा रहेगा हमारा हर एक जनम में ।

 

तुझे रास नहीं आएगी.. . 

तुझे रास नहीं आएगी इतनी ख़ुदपरस्ती,
ऐ दिल थोड़ा तो लोगों से मिल के चला कर।

शीशी में उतार लेंगे तेरी महक सारी,
गुलिस्तां में यूँ बेबाक न खिल के चला कर।

नमक की मंडी में उतरने से पहले,
सूफी ज़ख्मों को ज़रा सिल के चला कर।

तुझे नोच खाएंगे इस शहर के मसीहे,
तेवर अपने कुछ तो बदल के चला कर।

किसके लिए हैं यह तेरी ज़ाफ़रानी गज़लें,
रूख़ बदल अब इनका, न मचल के चला कर!!

 

 

मुहोब्बत ………

नमस्ते मेरे अपने….
मैं मुहोब्बत हूँ।
हाँ , सही पढ़ रहे हो,
मैं वही बदनाम मुहोब्बत हूँ।

सच कहु तो हर एक इंसान एक दूजे से मुहोब्बत की बंधन में बंधे होते हैं,
माँ- बाप अपने बच्चे से मुहोब्बत ही करते हैं,
भाई- बहन भी एक दूजे से मुहोब्बत करते हैं,
मित्रता का आधार भी भरोसा और मैं ही हूँ।

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किसी एक शख्स ने कहा था,
मुहोब्बत तुम्हे चाहे तो आबाद कर सकती हैं और चाहे तो बर्बाद।

पर क्या कुसूर सिर्फ मेरा ही हैं,
जात पात , परम्परा ये क्या मेरे बनाये हुए हैं?
बच्चे घर पर माँ- बाप को अपनी मुहोब्बत नही समझा सकते,
माँ – बाप बच्चोंकि मुहोब्बत नही समझ पाते।

एक कोई नौजवान किसीका जिस्म नोच कर मेरी धज्जिया उड़ा देता हैं,
एक कोई पढ़ी लिखी लड़की किसीकी भावनाओं का मजाक बना कर मुझे भी मजाक बना देती हैं,
अपने दिल का साथी ना मिला इस लिए मुहोब्बत के नाम कहकर अपनी जान देते हैं,
सब अपने मर्जी की करते हैं,
और बदनाम मैं होजाती हैं

मुझे समझ पाना हर किसीके लिए नही हैं पर मैं हर किसीके लिए हूँ।

मैं वो हूँ जो जीना जानती हूँ……
जिंदगी मेरी पहचान हैं….
हाँ मैं मुहोब्बत हूँ।

 

आसान नहीं होता निस्वार्थ पुरूष से प्रेम करना
क्योंकि उसे पसंद नहीं होती जी हुज़ूरी
झुकता नहीं वो कभी
जब तक न हो रिश्तों में प्रेम की भावना।

वो नहीं जानता
स्वांग की चाशनी में डुबोकर अपनी बात मनवाना
वो तो जानता है बेबाकी से सच बोलना।

फ़िजूल की बहस में पड़ना
उसकी आदतों में शुमार नहीं
लेकिन वो जानता है
तर्क के साथ अपनी बात रखना।

हुश्न के आगे वो
नतमस्तक नहीं होता,
झुकता है तो तुम्हारे निःस्वार्थ प्रेम के आगे।

हौसला हो निभाने का
तभी ऐसे पुरूष से प्रेम करना
क्योंकि टूट जाता है वो
धोखे से, छलावे से, स्त्री के अहंकार से
फिर नहीं जुड़ पाता, किसी प्रेम की ख़ातिर.!!

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तुम उस को देख कर छू कर भी ज़िंदा लौट आए हो,
मैं उस को ख़्वाब में देखूँ तो हैरानी से मर जाऊँ।।

मैं इतना सख़्त-जाँ हूँ दम बड़ी मुश्किल से निकलेगा,
ज़रा तकलीफ़ बढ़ जाए तो आसानी से मर जाऊँ।।

ग़नीमत है दीवारें मेरी तन्हाई समझते हैं,
गर ये न हों तो घर की वीरानी से मर जाऊँ।।

नफरत कर मुझ को ज़रा सा खुल के जीने दे,
कहीं ऐसा न हो तेरी निगरानी से मर जाऊँ।।

बहुत से शेर मुझ से ख़ून थुकवाते हैं शायरी पर,
मुझे वो प्यास है कि शायद पानी से मर जाऊ।।

तेरी नज़रों से गिर कर आज भी ज़िंदा हूँ क्या मैं,
तक़ाज़ा है ये ग़ैरत का परेशानी से मर जाऊँ.!!

 

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