Beautiful Mother Poem in Hindi | 20+ माँ पर हिंदी कविताएँ.!

Beautiful Mother Poem in Hindi

Beautiful Mother Poem in Hindi

माँ भी ना कुछ समझती ही नही हैं।

बचपन मे तुम्हारे रोने भर से तुम्हारी जरूरत जान लेती हैं,
तुम्हारे ऑंखों पर से तुम्हारा दर्द पहचान लेती हैं,
तुम्हारे चेहरे पर से तुम्हारी भूख को पढ़ लेती हैं,
माँ भी ना कुछ समझती ही नही हैं ।

मोबाइल चलाना सीखना वो चाहती हैं,
तुम दूर रहते हो तुम्हे देख पाने के हर मुमकिन जुगाड़ वो अपनाती हैं,
कभी कभार देर होजाए घर आने तो वजह तुमसे पूछ लेती हैं,
तुम कहते हो, माँ आप भी ना कुछ समझती ही नही हैं।

वो तुम्हारी आवाज पर से तुम्हारा मुड़ जान लेती हैं,
तुम्हे पापा ना डाँटे इसलिए तुम्हारी डाँट वो खा लेती हैं,
तुम्हारी गलती को नादानी समझ कर तुम्हे मार से बचाती रहती हैं,
माँ भी ना कुछ समझती ही नही हैं।

तुम्हे अगर बुखार हो, तुम्हारी हर सेवा वो करती हैं,
खुदकी भले ही तबियत खराब हो तुम्हारी हर फरमाइश पूरी करती हैं,
तुम निकाल भी दो अगर घर से उसे उफ्फ तक नही करती हैं,
माँ भी ना कुछ समझती नही हैं।

❤️ वृन्दा ❤️

 

मैं अपने छोटे मुख कैसे करूँ तेरा गुणगान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

माता कौशल्या के घर में जन्म राम ने पाया
ठुमक-ठुमक आँगन में चलकर सबका हृदय जुड़ाया
पुत्र प्रेम में थे निमग्न कौशल्या माँ के प्राण
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

दे मातृत्व देवकी को यसुदा की गोद सुहाई
ले लकुटी वन-वन भटके गोचारण कियो कन्हाई
सारे ब्रजमंडल में गूँजी थी वंशी की तान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

इसे भी पढ़ें:-  26 January Poetry in Hindi | 26 जनवरी के लिए कविता.!

तेरी समता में तू ही है मिले न उपमा कोई
तू न कभी निज सुत से रूठी मृदुता अमित समोई
लाड़-प्यार से सदा सिखाया तूने सच्चा ज्ञान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

कभी न विचलित हुई रही सेवा में भूखी प्यासी
समझ पुत्र को रुग्ण मनौती मानी रही उपासी
प्रेमामृत नित पिला पिलाकर किया सतत कल्याण
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

‘विकल’ न होने दिया पुत्र को कभी न हिम्मत हारी
सदय अदालत है सुत हित में सुख-दुख में महतारी
काँटों पर चलकर भी तूने दिया अभय का दान
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान

❤️ जगदीश प्रसाद सारस्वत ❤️

 

हर एक साँस की कहानी है तू
परी कोई प्यारी आसमानी है तू
जीती मरती है तू औलाद की खातिर
सिर्फ ममता की भूखी दीवानी है तू

तेरी गोदी से बढकर नही कोई भी चमन
हमेशा फरिश्तों से घिरा रहता था तन
गुजरा है तेरे संग हर लम्हा जन्नत में
ताउम्र महसूस होती रहेगी तेरी चाहतों की तपन
इश्क करना फितरत है तेरी
हर देवता की जानी पहचानी है तू

तू अदभुत साँस बनकर जिस्म को महकाती
हसीन जन्नत खुद तेरे करीब आ जाती
अजीब कशिश है तेरी चाहतों में माँ
तू रोते बालक को पल में हंसाती
कोई नही तुझसे बढकर खुबसुरत जग में
हजारों परियों की रानी है तू

दुआ है तेरी कोख से हो हर बार जन्म
भूलकर भी कभी ना हो तुझे कोई गम
तुझ जैसा कोई और चाह नही सकता
तू ही सच्ची दिलबर तू ही सच्ची हमदम
हर करिश्मे से है तू बड़ी
खुदा की जमीन पर मेहरबानी है तू

इसे भी पढ़ें:-  Top 10+ Best Poetry in Hindi | बेहतरीन कविताएं हिंदी में.!

❤️ नीरज रतन बंसल ❤️

Leave a Reply

Your email address will not be published.