26 January Poetry in Hindi | 26 जनवरी के लिए कविता.!

26 January Poetry in Hindi

.मत घबराओ, वीर जवानों
वह दिन भी आ जाएगा
जब भारत का बच्चा-बच्चा देशभक्त बन जाएगा।

कोई वीर अभिमन्यु बनकर, चक्रव्यू को तोड़ेगा
कोई वीर भगत सिंह बनकर अंग्रेजो के सिर फोड़ेगा।

धीर-धरो तुम वीर जवानों, मत घबराओ वीर जवानों
वह दिन भी आ जायेगा जब भारत का बच्चा-बच्चा देशभक्त बन जाएगा।

कलकल करती गंगा यमुना, जिसके गुण ये गाती हैं
भारत की इस पुण्य धरा में, अपना गुंजार सुनती हैं।

आज तिरंगे के रंगों को फीका नहीं होने देगे
इस तिरंगे की शान के लिए, अपना सर्वस्व लूटा देगे।

अब मत घबराओ वीर शहीदों, मत घबराओ वीर जवानों
वह दिन भी आ जायेगा, जब भारत का बच्चा-बच्चा देशभक्त बन जाएगा।

वीर अमर शहीदों की कुर्बानी को, कोई भुला ना पाएगा
जब आत्याचार बढ़ेगा धरती पर, एक महापुरुष आ जायेगा।

तेरी जिंदगी से बहुत दूर चले जाना है,
फिर न लौट कर इस दुनिया में आना है,
बस अब बहुत हुआ,
अब किसी का भी चेहरा इस दिल में कभी नहीं बसाना है,
तुम्हारी जिंदगी में अब मैं नहीं,
तुम्हारी जिंदगी में अब कोई और सही,
पर मेरे दिल में तुम हमेशा रहोगे,
मेरा अधूरा ख्वाब बनकर, मेरे हमनशीं,
न कर मुझे याद करके मुझपर और एहसान,
ऐसा न हो मुझे पाने की तमन्ना में,
चली जाए तेरी जान,
मैं भी कोशिश करूँगा भुलाने की तुझे,
नहीं तो हो जाऊँगा तेरे नाम पर कुर्बान ,
हसरतें दिल में दबी रह गयी,
तुझे पाकर भी जिंदगी में कुछ कमी रह गयी,
आँखों में तड़प और दिल में दर्द अब भी है,
न जाने तेरे जाने के बाद भी,
आँखों में नमी रह गयी,
मन करता है जो दर्द है दिल में,
बयां कर दूँ हर दर्द तुझसे,
अब ये दर्द छुपाए नहीं जाते,
लेकिन नहीं कह सकता कुछ तुझसे,
क्योंकि दिलो के दर्द दिखाए नहीं जाते!

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हम गणतंत्र भारत के निवासी,
करते अपनी मनमानी दुनिया की कोई फिक्र नहीं,
संविधान है करता पहरेदारी !!
है इतिहास इसका बहुत पुराना,
संघर्षों का था वो जमाना;
न थी कुछ करने की आजादी,
चारों तरफ हो रही थी बस देश की बर्बादी !!
एक तरफ विदेशी हमलों की मार,
दूसरी तरफ दे रहे थे कुछ अपने ही अपनो को घात !!
पर आजादी के परवानों ने हार नहीं मानी थी,
विदेशियों से देश को आजाद कराने की जिद्द ठानी थी !! एक के एक बाद किये विदेशी शासकों पर घात,
छोड़ दी अपनी जान की परवाह,
बस आजाद होने की थी आखिरी आस !!
1857 की क्रान्ति आजादी के संघर्ष की पहली कहानी थी, जो मेरठ, कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली और अवध में लगी चिंगारी थी !!

जब सूरज संग हो जाए अंधियारों के साथ
तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है।
जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में
तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है।

जब देश को खतरा हो गद्दारों से
तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है।
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का
तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है।

जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में
तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है।
जब नारी खुद को असहाय पाए
तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है।

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश
तो फिर सुभाष का आना जरूरी है।
जब सीधे तरीकों से देश न बदले
तब विद्रोह जरूरी है।

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,
अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

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अपना 67वाँ गणतंत्र दिवस खुशी से मनायेगे,
देश पर कुर्बान हुये शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे।

26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था,
भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंड़ा फहराया था।

मुख्य अतिथि के रुप में सुकारनो को बुलाया था,
थे जो इंडोनेशियन राष्ट्रपति, भारत के भी थे हितैषी,
था वो ऐतिहासिक पल हमारा, जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।

विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है,
पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है।

इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाये,
थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये,
आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,
अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

अमर वो उनकी बलिदानी याद रहे,
सालो से सालो तक न हो बात पुरानी,
आजाद हिन्द का तिरंगा रहे हमेशा ऊंचा।

खुशनसीब है हम जो यहाँ जन्म हम लीये,
यहाँ की मीट्टी की खुशबु,
यहाँ की हवायों का अपनापन,
हर दिल में राष्टगान का सम्मान रहे।

अगर झुकने लगे जो तिरंगा,
तो हम बलिदान कर दे खुद को,
सर कटा दे पर सर झुका सकते नही।

हिन्दुस्तान है सोने की चिड़ियाँ,
ईसाई ,सिख, हिन्दु हो या मुस्लीम हम जो भी हो,
हम जहां भी रहे,
सिर्फ हिन्दुस्तानी रहे,
अमर वो उनकी बलिदानी याद रहे।

आज नई सज-धज से गणतंत्र दिवस फिर आया है।
नव परिधान बसंती रंग का माता ने पहनाया है।
भीड़ बढ़ी स्वागत करने को बादल झड़ी लगाते हैं।
रंग-बिरंगे फूलों में ऋतुराज खड़े मुस्काते हैं।
धरती मां ने धानी साड़ी पहन श्रृंगार सजाया है। गणतंत्र दिवस फिर आया है।
भारत की इस अखंडता को तिलभर आंच न आने पाए।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई मिलजुल इसकी शान बढ़ाएं।
युवा वर्ग सक्षम हाथों से आगे इसको सदा बढ़ाएं।
इसकी रक्षा में वीरों ने अपना रक्त बहाया है। गणतंत्र दिवस फिर आया है।

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देखो फिर से गणतंत्र दिवस आ गया,
जो आते ही हमारे दिलों-दिमाग पर छा गया।
यह है हमारे देश का राष्ट्रीय त्यौहार,
इसलिए तो सब करते हैं इससे प्यार।

इस अवसर का हमें रहता विशेष इंतजार,
क्योंकि इस दिन मिला हमें गणतंत्र का उपहार।
आओ लोगो तक गणतंत्र दिवस का संदेश पहुचाएं,
लोगो को गणतंत्र का महत्व समझाये।

गणतंत्र द्वारा भारत में हुआ नया सवेरा,
इसके पहले तक था देश में तानाशाही का अंधेरा।
क्योंकि बिना गणतंत्र देश में आ जाती है तानाशाही,
नही मिलता कोई अधिकार वादे होते हैं हवा-हवाई।

तो आओ अब इसका और ना करें इंतजार,
साथ मिलकर मनाये गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्योहार।

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